**महिला संयोजक मंडल का घर घर जनसंपर्क अभियान जारी

हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में श्रीमद् वाल्मीकिर श्रीराम कथा आयोजन को लेकर उत्साह चरम पर दिखाई दे रहा है। महिला संयोजक मंडल का घर-घर जाकर निमंत्रण पत्र बांटने का अभियान निरंतर जारी है। ‌देखा जाएं तो हरिद्वार वर्ष भर धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन चलता रहता है। लेकिन आगामी जून माह में पहली बार प्रेमनगर आश्रम, हरिद्वार में ब्रह्मर्षि डॉ रामविलास दास वेदांती महाराज के मुखारविंद से श्रीमद् बाल्मीकिय रामायण का गुणगान किया जा रहा है। डॉ वेदांती महाराज का संकल्प है कि रामराज्य की स्थापना को लेकर भारत वर्ष के प्रमुख तीर्थस्थलों पर श्रीमद् वाल्मीकिय श्रीराम कथा का गुणगान करेंगे। उनके संकल्प को पूरा करने के लिए वशिष्ठ भवन धर्मार्थ सेवा ट्रस्ट की ओर से दिनांक 05 जून से लेकर 13 जून 2024 तक नवदिवसीय श्री मद् बाल्मीकिय श्रीरामकथा का आयोजन किया जा रहा है। वहीं 14 जून को पुर्णाहुति हवन एवं विशाल भंडारे के साथ कार्यक्रम का समापन होगा। कार्यक्रम में अनंत श्री विभूषित जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी अनंतानंद सरस्वती, राजगुरु मठ, काशी, महामंडलेश्वर स्वामी दयाराम दास, महामंडलेश्वर डॉ स्वामी संतोषानंद देव महाराज, डॉ राघवेश दास वेदांती महाराज का सानिध्य प्राप्त होगा। कार्यक्रम संयोजक सुनील सिंह ने बताया कि 05 जून को कलशयात्रा के सफल आयोजन के लिए महिला संयोजक मंडल लगातार घर-घर जाकर मातृ शक्ति को जागरूक करने का कार्य कर रही है। रंजीता झा, रंजना शर्मा, सोनी राय, रश्मि झा, अपराजिता, नीलम राय, प्रियंका पांडेय, लता गोयल, अंजलि अग्रवाल, मीना दूबे, अर्चना झा, भावना मनवाल, लता गोयल, हेमा चौहान, वाणी झा सहित अन्य सदस्यगण अभियान चलाकर लोगों को जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं।

मान्यता है कि भगवान राम के संपूर्ण चरित्र का आधार है। भगवान राम के सपूर्ण चरित्र को दर्शाने वाली कथा रामायण महाकाव्य की रचना महर्षि वाल्मीकि ने की थी। उन्होंने 24000 श्लोकों में श्रीराम उपाख्यान रामायण लिखा। रामायण में उन्होंने विभिन्न घटनाओं के समय चंद्रमा, सूर्य और नक्षत्रों की स्थिति का वर्णन किया है।

पौराणिक मान्यताओं के आधार पर यह माना जाता है कि सबसे पहले रामायण देवऋषि नारद ने वाल्मीकि जी को सुनाई थी। संसार का सारा ज्ञान भगवान शिव के मुख से निकला है। भगवान शिव ने माता पर्वती को रामायण की कथा सुनाई थी, माता सती के साथ उसे काकभुशुण्डि नाम के कौए ने सुना और उससे नारद ने रामायण को सुना। नारद ने जब यह कथा वल्मीकी जी को सुनाई तब उनका ह्रदय परिवर्तन हुआ और उन्होंने रामायण महाकाव्य की रचना कर दी। वाल्मीकि ने अपने काव्य में लिखा है कि माता सीता अपने पुत्र लव और कुश के साथ उनके आश्रम मे रहती थी और उन्हें पहले ही होने वाली घटनाओं का पता चल जाता था। वाल्मीकि ने भगवान राम के दोनों पुत्रों को रामायण संस्कृत में लयबद्ध ढ़ंग से सिखाई। जिसके बाद लव-कुश ने अपने पिता राम के सामने गाकर सुनाया था। रंजीत जालान, आशीष कुमार झा, जगदीश लाल पाहवा, रंजीत टिबडे़वाल, डॉ विशाल गर्ग, किरण सिंह, राकेश उपाध्याय, राम प्रसाद सिंह, नवीन तिवारी, सीए आशुतोष पांडेय, चंद्रमणि राय, मनोज शुक्ला, रूपलाल यादव, तरूण कुमार शुक्ल, राघवेन्द्र शर्मा, संदीप रोड, लज्जे राम शर्मा, राकेश राय, डॉ नमन अग्रवाल, तरूण त्यागी, तुषार अग्रवाल, निर्मल ठाकुर, बृजभूषण तिवारी, पुरूषोत्तम लाल अग्रवाल, अमित कुमार गोयल, मुरारी पांडेय, वरूण कुमार सिंह, अजय राय, सहदेव शर्मा, शिवाजी चौधरी, कुबेरनाथ वर्मा, डीएन मिश्रा, राजीव भटनागर, डॉ आर सिंह, सहित अन्य गणमान्य सदस्यगण कार्यक्रम की तैयारियों में जुटे हुए हैं।‌

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