विभाग-संबंधित संसदीय स्थायी समिति के माननीय अध्यक्ष एवं सदस्यों का परमार्थ निकेतन में गरिमामय आगमन*

*✨विश्वप्रसिद्ध परमार्थ गंगा आरती में सहभाग कर लिया माँ गंगा का आशीर्वाद, शांति एवं एकत्व का संदेश*

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में विभाग-संबंधित संसदीय स्थायी समिति, परिवहन, पर्यटन एवं संस्कृति के माननीय अध्यक्ष एवं सदस्यों का गरिमामय आगमन हुआ। माँ गंगा के पावन तट पर स्थित परमार्थ निकेतन में माननीय सदस्यों ने आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव किया तथा विश्वप्रसिद्ध परमार्थ गंगा आरती में श्रद्धापूर्वक सहभाग कर माँ गंगा का पूजन-अर्चन किया।

परमार्थ गंगा आरती का दिव्य वातावरण, वेद मंत्रों की मंगलमयी ध्वनि और माँ गंगा की अविरल धारा के मध्य माननीय अतिथियों ने राष्ट्र की सुख-शांति, समृद्धि, पर्यावरण संरक्षण तथा समस्त मानवता के कल्याण के लिए प्रार्थना की। इस अवसर ने भारत की समृद्ध आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा को अनुभव करने के साथ-साथ पर्यटन, संस्कृति, पर्यावरण और अध्यात्म के सुंदर समन्वय का साक्षात्कार कराया। परमार्थ निकेतन की गंगा आरती आज विश्वभर में भारत की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बन चुकी है। परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में परमार्थ निकेतन से देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु एवं अतिथि एक साथ “सर्वे भवन्तु सुखिनः” की भावना को आत्मसात करते हैं।

इस पावन अवसर पर श्री संजय कुमार झा जी, श्री राजीव प्रताप रूडी जी, श्रीमती एस. फांगनोन कोन्याक जी, श्री देवेश चंद्र ठाकुर जी, श्री मनोज तिवारी जी, श्री मियां अल्फार अहमद जी, श्री तापिर गाओ जी, श्रीमती जून मलियाह जी, कुमारी सेलजा जी, श्री अविमन्यु सेठी जी, श्री अमरसिंग तिस्सो जी एवं श्री मोहम्मद नदिमुल हक जी सहित समिति के अन्य माननीय सदस्यों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

माननीय सदस्यों का परमार्थ निकेतन आगमन भारत की उस सनातन परंपरा से जुड़ने का अवसर है। माँ गंगा भारतीय सभ्यता, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना की जीवनधारा हैं। परमार्थ निकेतन सदैव से ही स्वच्छ गंगा, स्वच्छ पर्यावरण, योग, भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और मानव सेवा के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने के लिए समर्पित है।

इस अवसर पर परमार्थ परिवार से सुश्री गंगा नन्दिनी जी एवं आचार्य दीपक शर्मा जी ने माननीय अतिथियों का आत्मीय अभिनंदन करते हुए परम पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी एवं पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती जी द्वारा रचित सद्साहित्य भेंट किया।

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