टीबी स्क्रीनिंग में तेजी लाएं, हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की नियमित मॉनिटरिंग करें: जिलाधिकारी

‎सूचना/टिहरी/ ‎जिलाधिकारी टिहरी नितिका खण्डेलवाल ने जिला सभागार में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संचालित विभिन्न राष्ट्रीय कार्यक्रमों एवं मातृत्व स्वास्थ्य कार्यक्रम की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने टीबी मुक्त भारत अभियान, वैक्सीनेबल पॉपुलेशन (टीकाकरण योग्य आबादी), एचपीवी वैक्सीनेशन, टीबी स्क्रीनिंग, एनसीडी स्क्रीनिंग (गैर-संचारी रोगों की जांच), फेस ऑथेंटिकेशन सहित अन्य स्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्रगति की जानकारी ली।
‎‎जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जिन क्षेत्रों में टीबी स्क्रीनिंग की प्रगति कम है, वहां स्क्रीनिंग का दायरा बढ़ाया जाए। उन्होंने विकासखंडवार आयोजित किए जा रहे स्वास्थ्य शिविरों, प्रतिदिन लगाए जा रहे कैंपों और उनमें की जा रही स्क्रीनिंग की जानकारी लेते हुए आवश्यकतानुसार कैंपों की संख्या बढ़ाने को कहा।
‎‎बैठक में बताया गया कि जनपद में 5 से 16 अगस्त तक 34 स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से कुल 3,085 एक्स-रे स्क्रीनिंग की गई हैं। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि शिविर वाले क्षेत्रों में स्क्रीनिंग कार्य में कमी न आए तथा छूटे हुए व्यक्तियों को भी जांच के दायरे में लाया जाए। उन्होंने विकासखंडवार एचपीवी वैक्सीनेशन की उपलब्धि, एनसीडी स्क्रीनिंग के तहत हाइपरटेंशन (एचटीएन) की जांच तथा फेस ऑथेंटिकेशन की स्थिति की समीक्षा करते हुए निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप प्रगति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
‎‎मातृत्व स्वास्थ्य कार्यक्रम की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के मामलों की समय से पहचान कर आवश्यकतानुसार उन्हें उच्च स्वास्थ्य केंद्रों पर रेफर करने के निर्देश दिए। उन्होंने गर्भवती महिलाओं की नियमित स्वास्थ्य जांच एवं निरंतर मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने तथा हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की सूची तैयार कर उनकी विशेष निगरानी करने को कहा, ताकि आवश्यकता पड़ने पर समय से उपचार और रेफरल की सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।
‎‎मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राम प्रकाश ने बताया कि हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की प्रभावी मॉनिटरिंग के लिए वार रूम तैयार किया जा रहा है। इसमें टोल-फ्री नंबर के माध्यम से कॉल सेंटर स्थापित किया जाएगा, जिसके जरिए गर्भवती महिलाओं एवं संबंधित स्वास्थ्य सेवाओं की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी।
‎‎बैठक में टीपीटी (टीबी निवारक उपचार) की प्रगति की भी समीक्षा की गई। टीपीटी के माध्यम से टीबी संक्रमण के जोखिम वाले पात्र व्यक्तियों को निवारक उपचार उपलब्ध कराया जाता है, जिससे संक्रमण के सक्रिय टीबी रोग में बदलने की संभावना को कम किया जा सके। जिलाधिकारी ने संबंधित व्यक्तियों की पहचान, जांच एवं उपचार की प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए।
‎‎बैठक में मुख्य विकास अधिकारी वरुणा अग्रवाल, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. निधि रावत, डॉ. अमलेश, ‎मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ब्रजेश डोभाल सहित समस्त नोडल अधिकारी टीबी मुक्त भारत अभियान, समस्त प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, समस्त एस.टी.एस. सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं संबंधित कार्मिक उपस्थित रहे।

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