स्टाम्प शुल्क एवं रजिस्ट्रीकरण नियमों के शत-प्रतिशत अनुपालन पर जोर, उल्लंघन पर होगी कठोर कार्रवाई

कलेक्ट्रेट सभागार में रजिस्ट्रीकरण एवं निबन्धन विभाग द्वारा स्टाम्प शुल्क एवं रजिस्ट्रीकरण सम्बन्धी प्रावधानों पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए अपर जिलाधिकारी शैलेंद्र सिंह नेगी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिन अभिलेखों का विधि अनुसार पंजीकरण अनिवार्य है, उनका समयबद्ध रजिस्ट्रीकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि कोई दस्तावेज पंजीकृत नहीं कराया जाता है, तो नियमानुसार दस गुना तक की पेनाल्टी लगाई जाएगी।

अपर जिलाधिकारी ने बताया कि एक वर्ष से कम अवधि की लीज का अनुबंध रु० -100 के स्टाम्प पर किया जा सकता है, जबकि एक वर्ष से अधिक अवधि की लीज का उप निबन्धक कार्यालय में पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। उन्होंने जिला पर्यटन अधिकारी को निर्देशित किया कि जनपद के सभी होटल एवं पर्यटन प्रतिष्ठानों की समीक्षा कर यह सुनिश्चित करें कि लीज पर संचालित सभी प्रतिष्ठानों का विधिवत पंजीकरण कराया जाए ।

कार्यशाला में सहायक निदेशक निबन्धन विभाग रेखा नेगी ने विभागीय नियमों की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि विभिन्न विभागों, स्थानीय निकायों एवं संस्थानों द्वारा निर्मित दुकानों, भवनों एवं अन्य परिसंपत्तियों को विक्रय, लीज, ठेके अथवा अनुबंध के माध्यम से उपलब्ध कराया जाता है, किंतु अनेक मामलों में आवश्यक स्टाम्प शुल्क अदा नहीं किया जाता तथा दस्तावेजों का विधिसम्मत रजिस्ट्रीकरण भी नहीं कराया जाता।

उन्होंने कहा कि तहबाजारी, नुमाइश, खनन, बाजारों की नीलामी सहित विभिन्न प्रकार के ठेकों में भी उचित स्टाम्प शुल्क का भुगतान एवं आवश्यक रजिस्ट्रीकरण सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है। इस संबंध में सभी विभागों को रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 की धारा-17 तथा भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की धारा-33 का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए गए।

कार्यशाला के दौरान विभिन्न विभागों एवं निकायों के अधिकारियों द्वारा स्टाम्प शुल्क, रजिस्ट्रीकरण तथा अनुबंधों से संबंधित व्यावहारिक प्रश्न पूछे गए, जिनका विशेषज्ञों द्वारा विस्तारपूर्वक समाधान किया गया। अधिकारियों को भविष्य में सभी प्रकार के अनुबंध एवं अभिलेख विधिवत स्टाम्प शुल्क के साथ कर अनिवार्य होने पर उनका पंजीकरण कराने के लिए जागरूक किया गया।

कार्यशाला में निबन्धन विभाग के प्रतीक पुण्डीर सहित विभिन्न विभागों एवं निकायों के अधिकारी वर्चुअल माध्यम से भी जुड़े रहे।

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