हरिद्वार। थाना श्यामपुर क्षेत्र अंतर्गत ग्राम लहाडपुर स्थित मां काली के प्राचीन मंदिर में सिद्ध कुटी के परमाध्यक्ष ब्रह्मलीन बाल भगवान 1008 श्री रामेश्वर दास जी महाराज की 19वीं पवन पुण्यतिथि उनके परम शिष्य मां काली मंदिर के संस्थापक संत निर्मल मुनि जी महाराज ने बड़े ही धूमधाम हर्षोल्लास के साथ मनाएं। इस अवसर पर बोलते हुए निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर 1008 श्री संजय गिरी जी महाराज ने कहा बाबा श्री बाल भगवान रामेश्वर दास जी महाराज तपो भूमि के तपस्वी ज्ञान मूर्ति संत थे। इस अवसर पर बोलते हुए नीलेश्वर तथा गौरीशंकर महादेव मंदिर के श्री महंत हरिदास महाराज ने कहा यह तपो स्थली तपस्वी ज्ञान मूर्ति संतों की तपोभूमि है यहां पर बड़े से बड़े तपस्वी साधु संतों का परम सानिध्य भक्तजनों को प्राप्त होता है बाल भगवान रामेश्वर दास जी महाराज ने सनातन धर्म की अलख विश्व भर मे जागाई वह बड़े ही दुर्लभ तेजस्वी ज्ञान मूर्ति तपस्वी संत थे उनकी 19वीं पवन तिथि पर हम उन्हें अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं ब्रह्मलीन बाल भगवान श्री श्री रामेश्वर दास जी महाराज के परम शिष्य संत निर्मल मुनि जी महाराज ने कहा परम पूज्य गुरुदेव साक्षात ईश्वर की प्रतिमूर्ति थे हम लोग बड़े ही भाग्यशाली हैं कि उनके दर्शन हमें प्राप्त हुए तथा उनका सानिध्य मुझे मिला मेरा जीवन धन्य हो गया वे साक्षात मेरे लिए भगवान राम भगवान भोलेनाथ के अवतार थे मैं उनके श्री चरणों में शत-शत नमन करता हूं इस अवसर पर बोलते हुए महंत अमरनाथ महाराज ने कहा ऐसी दुर्लभ मूर्तियों दुर्लभ संतों के दर्शन बड़े ही भाग्य से प्राप्त होते हैं महंत कमलेशानंद महाराज ने कहा महाराज जी का तपोबल आज भी उनके सिद्ध कुटिया स्थान में विद्यमान है ऐसे ही दुर्लभ मूर्तियों के दर्शन बड़े ही भाग्यशाली लोग कर पाते हैं वरिष्ठ कोतवाल कालीचरण जी महाराज ने कहा संत तो बहुत मिल जाते हैं किंतु ऐसे तपो मूर्ति जगत को कल्याण का मार्ग दिखाने वाले संत बिरला ही मिल पाते हैं बड़े ही भाग्यशाली हैं बाल भगवान रामेश्वर दास जी महाराज के शिष्य तथा भक्तगण जो उन्हें उनके दर्शनों का लाभ प्राप्त हुआ इस अवसर पर सर्व श्री भजन दास महाराज धर्मदास महाराज सरजीत दास महाराज कहर सिंह प्रताप संत निर्मल मुनि महंत पंकज गिरि महंत अमरनाथ महेंद्र रितुराज गिरी महंत हरिदास महाराज चौधरी ऋषि पाल प्रधान आदेश जी आकाश ठाकुर बिट्टू चौधरी सनी शर्मा मांगेराम चौधरी नीरज चौधरी दीपक सहित भारी संख्या में संत तथा भक्तगण उपस्थित थे

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