क्षार सूत्र चिकित्सा से संभव है पाइल्स फिस्टुला जैसी बीमारियों का स्थाई इलाज: प्रोफ. अजय कुमार गुप्ता

होम्योपैथी न होती तो मेरी बेटी न होती: डॉ पवन सिंह

हरिद्वार। आयुष्कामीय शिविर के तीसरे दिन सत्र की अध्यक्षता प्रोफ. अजय कुमार गुप्ता सर विभागाध्यक्ष, शल्य, ऋषिकुल केंपस और डॉ सुशील शर्मा, वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ इंटीग्रेटिव कार्डियोलॉजी सेंटर, रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम द्वारा की गई। साथ में विशिष्ट अतिथि के रूप में स्वामी अनंतानंद जी महाराज, कृष्णायन गौशाला, डॉ प्रदीप खेर, योगाचार्य जान्हवी प्राकृतिक चिकित्सा केन्द्र, डॉ दिनेश सिंह, वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक, डॉ विकास जैन, वरिष्ठ चिकित्सक ज्वालापुर , डॉ अवनीश उपाध्याय नोडल अधिकारी, डॉ स्वास्तिक सुरेश, जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी, डॉ विकास ठाकुर जिला होम्योपैथिक अधिकारी, श्रीमती रुचिता त्रिपाठी उपाध्याय प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग विज्ञान विशेषज्ञ उपस्थित रहे। शिविर में अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रोफ. अजय कुमार गुप्ता ने गलत जीवन शैली और खान-पान से होने वाली बीमारियों और उसके आयुर्वेदिक छार सूत्र चिकित्सा पर प्रकाश डाला। वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ सुशील शर्मा ने कहा कि अध्यात्म के बिना चिकित्सा संभव नहीं है। डॉ शर्मा ने जीवन शैली जनित बीमारियों और हमारे द्वारा की जाने वाली सामान्य गड़बड़ियां और उनको दूर करने के योग वेदांत के उपाय को बड़ी सरलता से समझाया। योगाचार्य डॉ प्रदीप खेर ने कहा कि आयुर्वेद योग और प्राकृतिक चिकित्सा की जागरूकता लाने में इस तरह के शिविर बहुत प्रभावी साबित होंगे। डॉ दिनेश सिंह ने अपनी बेटी के ब्रेन ट्यूमर और उसकी होम्योपैथी चिकित्सा से पूरी तरह स्वस्थ होने की बात सभी आगंतुओं को बताई। उन्होंने भावुक होकर कहा कि होम्योपैथी न होती तो मेरी बेटी न होती। डॉ प्रदीप कुमार द्वारा आयुर्वेद के विभिन्न विषयों पर प्रकाश डाला गया।

 

शिविर के अंतिम दिन आज स्कूली बच्चों हेतु आयुष से संबंधित प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। जिसमें तमाम स्कूली बच्चों ने भाग लिया। चित्रकला में औषधीय गुण से युक्त किसी भी पौधे, फूल या खरल का चित्र बनाने की जज स्वामी अनंतानंद जी महाराज द्वारा प्रथम पुरस्कार प्रखर वसिष्ठ, द्वितीय पुरस्कार तारीक दास और तृतीय पुरस्कार हीरल चौहान को दिया गया। मानसिक स्वास्थ्य, आयुर्वेद एवं जीवन, पंचमहाभूत, किचन के मसालों का औषधीय उपयोग विषय पर हुए लेखन प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार निलयांश उपाध्याय, द्वितीय पुरस्कार, माईशा नावेद और तृतीय पुरस्कार प्रज्ञा ठाकुर ने प्राप्त किया।

आज के कार्यक्रम में मंच का संचालन डॉक्टर नावेद आजम, डॉक्टर सुजाता और डॉक्टर मनीष चौहान द्वारा किया गया। धन्यवाद ज्ञापन में डॉ विकास ठाकुर जिला होम्योपैथिक अधिकारी ने कहां कि मेरा मैसेज सिर्फ यह है कि यह जो प्रकृति बेस्ड साइंस है उसकी स्ट्रैंथ को जानिए, यह शिविर हम इसलिए लग रहे हैं कि हमारी स्ट्रैंथ क्या है इसका आम जनमानस में प्रचार प्रसार हो सके। अंत में डॉ ठाकुर ने शिविर में कार्य करने वाले सभी कार्मिकों का धन्यवाद ज्ञापन किया। शिविर में 1537 मरीजों की आयुष की विभिन्न विधाओं जैसे आयुर्वेदिक, यूनानी, होम्योपैथिक और योग द्वारा चिकित्सा की गई। लोक अनुदेशको द्वारा आने वाले आगंतुओं को योर का अभ्यास कर आया गया। आज के अंतिम दिन के कार्यक्रम में मुख्य रूप से डॉ प्रदीप कुमार, डॉ विकास दुबे, डॉ कपिल गुप्ता, डॉ अश्वनी कौशिक, डॉ घनेंद्र वशिष्ठ, दो दीक्षा, डॉ मोनिका प्रभाकर, डॉ रेनू सिंह, डॉ शाजिया समीम, डॉ मंजू नेगी, डॉ बोधराज सेमवाल उपास्थित रहे।

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