*💥परमार्थ निकेतन में 11 से 15 अक्टूबर तक माँ शबरी रामलीला का दिव्य आयोजन*

*✨माँ गंगा के पावन तट पर चौथी बार साकार होे रही भक्ति, समरसता, त्याग और श्रीराम जी के प्रति अनन्य प्रेम की अनुपम गाथा*

*🌺परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, श्री वीरेन्द्र सचदेवा जी, सह-प्रभारी, भारतीय जनता पार्टी, पंजाब, मानद महासचिव, भारतीय तीरंदाजी संघ,कार्यकारी बोर्ड सदस्य, विश्व तीरंदाजी एशिया, मैनेजिंग ट्रस्टी सैस फाउंडेशन, अध्यक्ष मां शबरी रामलीला, श्री शक्ति बख्शी जी और सभी कलाकरों ने दीप प्रज्वलित कर मां शबरी रामलीला का किया शुभारम्भ*

ऋषिकेश, 12 अक्टूबर 2026। माँ गंगा के पावन तट पर स्थित परमार्थ निकेतन में 11 से 15 अक्टूबर तक माँ शबरी रामलीला का भव्य एवं भावपूर्ण आयोजन हुआ। यह आयोजन भक्ति, समर्पण, सामाजिक समरसता, नारी गरिमा और मानवता के शाश्वत मूल्यों को जीवंत करने का एक दिव्य प्रयास है। आदिवासी एवं जनजातीय कलाकारों द्वारा प्रस्तुत मां शबरी रामलीला अपनी सहजता, लोकसंस्कृति, भावपूर्ण अभिनय और आध्यात्मिक ऊर्जा से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर रही है।

माँ गंगा के तट, परमार्थ निकेेतन में चौथी बार आयोजित हो रही माँ शबरी रामलीला उस सनातन संदेश को पुनः प्रतिष्ठित कर रही है कि प्रभु श्रीराम के हृदय तक पहुँचने का मार्ग बाहरी वैभव से नहीं, बल्कि निर्मल प्रेम, निष्कपट भक्ति और समर्पित भाव से होकर जाता है। रामायण की इस अमर गाथा में माँ शबरी का चरित्र भारतीय आध्यात्मिक परंपरा का ऐसा अनुपम उदाहरण है, जिसमें प्रतीक्षा साधना बन जाती है, सेवा आराधना बन जाती है और प्रेम स्वयं परमात्मा तक पहुँचने का सेतु बन जाता है।

इस आयोजन की विशेषता यह है कि इसमें आदिवासी एवं जनजातीय समुदायों के कलाकार अपनी लोकपरंपराओं, सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों और जीवंत अभिनय के माध्यम से रामकथा को जन-जन तक पहुँचा रहे हैं। उनकी प्रस्तुति में पीढ़ियों से संजोई गई सांस्कृतिक विरासत, लोकजीवन की सहजता और प्रभु श्रीराम के प्रति अटूट श्रद्धा की झलक स्पष्ट दिखाई देती है। प्रत्येक दृश्य दर्शकों को कथा के साथ भावनात्मक रूप से जोड़ता है और उन्हें भारतीय संस्कृति की उस समावेशी चेतना का अनुभव कराता है, जहाँ हर समुदाय, हर परंपरा और हर व्यक्ति का सम्मान है।

माँ शबरी की कथा विश्वास, धैर्य और निष्काम प्रेम की पराकाष्ठा है। वर्षों तक प्रभु श्रीराम के आगमन की प्रतीक्षा करती माँ शबरी का जीवन संदेश देता है कि सच्ची भक्ति में न कोई अहंकार होता है, न कोई अपेक्षा और न ही किसी प्रकार का भेदभाव। उनके द्वारा प्रेमपूर्वक अर्पित किए गए बेर यह संदेश देते हैं कि ईश्वर के लिए भोग का मूल्य नहीं, बल्कि भक्त के भाव की पवित्रता महत्त्वपूर्ण है। प्रभु श्रीराम द्वारा माँ शबरी के प्रेम और समर्पण को स्वीकार करना सामाजिक समानता, मानवीय गरिमा और आध्यात्मिक समरसता का शाश्वत उद्घोष है।

परमार्थ पीठाधीश्वर, परम पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के पावन सान्निध्य में माँ गंगा के तट परमार्थ निकेतन में और महाकुम्भ के दौरान परमार्थ शिविर में रामलीला का यह आयोजन भारतीय संस्कृति की जीवंत परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के साथ-साथ समाज को प्रेम, सेवा, सद्भाव और एकात्मता के सूत्र में जोड़ने का माध्यम है।

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज का संदेश है कि माँ शबरी की भक्ति का यहीं संदेश है कि ईश्वर किसी जाति, वर्ग, भाषा, क्षेत्र या सामाजिक पहचान की सीमाओं में बँधे नहीं हैं। प्रभु श्रीराम वहाँ विराजते हैं, जहाँ प्रेम है, करुणा है, सेवा है और सबको अपनाने का भाव है। श्रद्धा और समर्पण के सामने सामाजिक भेदभाव का कोई स्थान नहीं। आज आवश्यकता है कि हम रामकथा के इन मूल्यों को केवल सुनें नहीं, बल्कि अपने जीवन, व्यवहार और सामाजिक व्यवस्था में भी उतारें। जब समाज के अंतिम व्यक्ति तक सम्मान, अवसर और अपनत्व पहुँचेगा, तभी रामराज्य की भावना वास्तविक रूप में साकार होगी।

माँ शबरी रामलीला का यह आयोजन नारी शक्ति और नारी गरिमा का भी प्रेरक संदेश देता है कि आध्यात्मिक ऊँचाई किसी बाहरी पहचान से नहीं, बल्कि अंतःकरण की पवित्रता, दृढ़ विश्वास और साधना से प्राप्त होती है। उनका चरित्र हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने विश्वास, मूल्यों और संकल्प को बनाए रखता है।

मां शबरी रामलीला के माध्यम से प्रत्येक संध्या भक्ति और संस्कृति के अद्भुत संगम का अनुभव करायेगी। माँ गंगा की अविरल धारा, प्रभु श्रीराम की कथा, कलाकारों की सजीव प्रस्तुतियाँ और दर्शकों की श्रद्धा मिलकर ऐसा वातावरण निर्मित करते हैं, जिसमें भारतीय संस्कृति के आध्यात्मिक एवं मानवीय मूल्य सहज रूप से हृदय तक पहुँचते हैं। यह केवल अतीत की कथा का मंचन नहीं, बल्कि वर्तमान समाज के लिए जीवनमूल्यों का पुनर्स्मरण और भविष्य की पीढ़ियों के लिए संस्कारों की अमूल्य धरोहर है।

परमार्थ निकेतन सभी श्रद्धालुओं, भक्तों, पर्यटकों और संस्कृति प्रेमियों को इस दिव्य आयोजन से जुड़ने के लिए आमंत्रित करता है। जो श्रद्धालु प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित नहीं हो सकते, वे परमार्थ निकेतन के आधिकारिक सोशल मीडिया पेजों के माध्यम से जुड़ सकते हैं।

सैस फ़ाउंडेशन के तत्वावधान में माँ गंगा के पावन तट पर स्थित परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश में आयोजित माँ शबरी रामलीला महोत्सव में सम्मिलित होकर प्रभु श्रीराम की दिव्य लीलाओं के दर्शन करें।

ओडिशा एवं छत्तीसगढ़ के प्रतिभाशाली कलाकारों द्वारा संगीतमय नाट्य शैली में प्रस्तुत रामलीला भारतीय लोककला, संस्कृति, संगीत और अभिनय-कौशल का अद्भुत संगम है। यह महोत्सव हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संजोने और नई पीढ़ी तक श्रीराम के आदर्शों को पहुँचाने का प्रेरणादायी प्रयास है।

इस अवसर पर श्री विश्व मोहन शर्मा जी, श्री मनोज त्यागी जी, श्री सुमित कुमार जी, श्री जितेंदर चौरसिया जी, डा मुकेश कुमार जी का अद्भुत सहयोग रहा। अपनी अद्भुत प्रस्तुतियों से सभी का मन मोहने वाले कलाकार राहुल, हितेश, चंचल, राहुल परिहार एवं हरमीत सिंह, निदेशक डॉ. अनु जी, चारू सिंह जी तथा उपनिदेशक श्री प्रवीण जी का विशेष योगदान रहा।

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