पं. गोविंद बल्लभ पंत जी की जयंती पर परमार्थ निकेतन की भावपूर्ण श्रद्धांजलि
लोकमाता’ अहिल्याबाई होल्कर जी की पुण्यतिथि पर नमन
ऋषिकेश, 10 सितम्बर। भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, राष्ट्रनिर्माता, पूर्व गृह मंत्री एवं उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री, भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत जी की जयंती के पावन अवसर पर परमार्थ निकेतन की ओर से उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि। पंडित जी के द्वारा की राष्ट्रसेवा, सुशासन, सामाजिक समरसता और जनकल्याण के लिए किए गए अतुलनीय योगदान का स्मरण किया, उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्रभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और सेवा का प्रेरणापुंज है।
पंडित गोविंद बल्लभ पंत जी उन महान राष्ट्रनायकों में थे जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने के साथ ही स्वतंत्र भारत के निर्माण में भी अपना अमूल्य योगदान दिया। उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने शिक्षा, कृषि, सिंचाई, औद्योगिक विकास, सामाजिक सुधार और प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए। स्वतंत्र भारत के गृह मंत्री के रूप में भी उन्होंने राष्ट्रीय एकता, अखंडता और लोकतांत्रिक मूल्यों को सशक्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने अपने संदेश में कहा कि भारत की महान परंपरा में सुशासन अर्थात् शासन में संवेदना, न्याय, धर्मनिष्ठा और लोककल्याण की भावना का समावेश है। हमारे ऋषियों ने ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ की भावना को जीवन और शासन का आधार माना। पंडित गोविंद बल्लभ पंत जी का जीवन इसी भारतीय चिंतन की आधुनिक अभिव्यक्ति है।
परमार्थ निकेतन ने भारतीय इतिहास की महान वीरांगना एवं न्यायप्रिय शासिका लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के जीवन और उनके सुशासन के आदर्शों को भी स्मरण किया। लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर जी ने अपने शासनकाल में धर्मनिष्ठा, न्याय, करुणा और लोकसेवा का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने व्यक्तिगत जीवन को राजवैभव से नहीं, बल्कि जनकल्याण से जोड़ा और भारत की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने देश के अनेक तीर्थस्थलों पर मंदिरों, घाटों, धर्मशालाओं और जनोपयोगी संरचनाओं का निर्माण कराया। काशी से लेकर गया, सोमनाथ से लेकर हरिद्वार और देश के अनेक पवित्र तीर्थों तक उनकी सेवा-दृष्टि के चिह्न आज भी भारतीय संस्कृति की जीवंत धरोहर के रूप में विद्यमान हैं।
पूज्य स्वामी जी ने अपने संदेश में कहा कि पंडित गोविंद बल्लभ पंत जी और लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर जी जैसी विभूतियों ने अपने पद को प्रतिष्ठा नहीं, उत्तरदायित्व माना और अपने जीवन को स्वयं से ऊपर उठाकर समाज तथा राष्ट्र को समर्पित किया। आज जब समाज और राष्ट्र तीव्र परिवर्तन के दौर से गुजर रहे हैं, तब ऐसे आदर्शों का स्मरण और भी आवश्यक हो जाता है।
परमार्थ निकेतन की ओर से इस पावन अवसर पर आह्वान किया कि वे पंडित गोविंद बल्लभ पंत जी के राष्ट्रसेवा के आदर्शों और लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर जी की धर्मनिष्ठा एवं लोककल्याण की भावना को अपने जीवन में आत्मसात करें।

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