परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी बैंकाक यात्रा पर*

स्वर्णभूमि एयरपोर्ट पर उतरते ही भारतीय संस्कृति की अद्भुत झलकियाँ*

भारतीय ज्ञान परम्परा का विस्तार बैंकाक में स्पष्ट*

स्वर्णभूमि एयरपोर्ट से लेकर हर कोने में आध्यात्मिक सरिता की जीवंत धारायें प्रवाहित*

आध्यात्मिक प्रवास के दौरान पटेल परिवार ने पूज्य स्वामी जी और पूज्य साध्वी जी को वर तेजस और वधु जानकी के विवाह समारोह में विशेष रूप से आमंत्रित किया*

नव दम्पति तेजस व जानकी ने लिया पूज्य स्वामी जी का आशीर्वाद*

बैंकाक, ऋषिकेश, 30 नवम्बर। परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और डिवाइन शक्ति फाउंडेशन की अध्यक्ष डा साध्वी भगवती सरस्वती जी बैंकाक प्रवास पर हैं। स्वर्णभूमि एयरपोर्ट पर उतरते ही उन्हें भारतीय संस्कृति की अद्भुत, सौम्य तथा आध्यात्मिक झलकियाँ देखने को मिलीं।

पूज्य स्वामी जी व साध्वी जी को अपने बीच पाकर स्थानीय लोग गद्गद हो गये। इस दौरान उन्होंने बैंकाक-थाईलैंड के राजपरिवार, पटेल परिवार और स्थानीय लोगों से भेंट की। स्थानीय लोगों ने बैंकाक में मनाये जाने वाले पर्वो व त्यौहारों का जिक्र करते हुये कहा कि जैसे भारत में नवरात्रि का पर्व शुचिता, पवित्रता और सात्त्विकता के साथ मनाया जाता है, उसी प्रकार बैंकाक में भी उन दिनों को अत्यंत शुद्धता, पवित्रता व सात्विकता के साथ, सात्विक आहार ग्रहण कर मनाया जाता है। बैंकाक में भारतीय ज्ञान, परम्परा का स्वभाविक विस्तार सहज ही दिखाई देता है। स्वर्णभूमि एयरपोर्ट से लेकर शहर के हर कोने में आध्यात्मिक सरिता की एक जीवंत धारा मानो प्रवाहित होती प्रतीत होती है।

बैंकाक में रहने वाले भारतीय संस्कृति के उपासकों का उत्साह और समर्पण विशेष रूप से उल्लेखनीय है। वे नवरात्रि पर्व को भारत की ही तरह श्रद्धा और भक्ति से मनाते हैं। नौ दिनों तक शुद्ध सात्त्विक आहार ग्रहण करते हैं और नवमी के दिन भगवान शिव तथा प्रभु श्री राम की रथयात्रा बड़े ही हर्षोल्लास से निकालते हैं। यहां के मन्दिरों में और रथयात्रा के आयोजन में भारतीय मूल के पुरोहित सम्मिलित होते हैं और थाई नागरिक भी बड़ी प्रसन्नता और सहयोग भाव से इसमें सहभागी बनते हैं। पूरा परिसर भारतीय संस्कृति के भाव, भक्ति और रंगों से सराबोर हो जाता है।

यहां के राजपरिवार के हृदय में भी भारतीय संस्कृति और संस्कारों के प्रति अगाध श्रद्धा है। वे हर धार्मिक गतिविधि में गहन भक्ति और सम्मान के साथ सहभागी होते हैं तथा स्वयं को लवकुश के वंशज मानते हैं। विगत माह राजमाता का शरीर शांत हुआ। पूज्य स्वामी जी और पूज्य साध्वी जी ने पूरे राजपरिवार से मिलकर उनकी आत्मा की शांति हेतु प्रार्थना की। इस दौरान थाईलैंड में आए बाढ़ के कारण हुए नुकसान के लिए भी विशेष प्रार्थना की गई।

रथयात्रा के दौरान थाई भक्तों का समर्पण अत्यंत प्रेरणादायक होता है। वे पूजन-अर्चन के साथ प्रभु को नारियल अर्पित करते हैं। उनका विश्वास है कि नारियल समर्पण का प्रतीक है, जिसके माध्यम से वे स्वयं को प्रभु को अर्पित कर रहे हैं। थाई संस्कृति भगवान बुद्ध की शिक्षाओं से सुसज्जित है, परन्तु यहां भगवान शिव, भगवान गणेश, प्रभु श्री राम तथा सभी देव रूपों की पूजा अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ होती है। यह दृश्य भारतीय संस्कृति की वैश्विक स्वीकृति और आध्यात्मिक प्रभाव का सशक्त प्रमाण है।

बैंकाक और थाईलैंड के अन्य क्षेत्रों से अनेक श्रद्धालु प्रतिवर्ष भारत के पावन बोधगया में आते हैं। यह उनकी भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और भारतीय आध्यात्मिक धरोहर के प्रति गहरी श्रद्धा का प्रमाण है।

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि थाई लोगों ने भारतीय संस्कृति को केवल अपनाया ही नहीं, बल्कि अपने देश और दिल दोनों में सुरक्षित तथा संरक्षित भी रखा है। जैसे ही वे स्वर्णभूमि एयरपोर्ट से पटाया की ओर बढ़े, हर ओर भारतीयता की सुगंध और आध्यात्मिकता का सौम्य स्पर्श अनुभव हुआ। इसके साथ ही उन्होंने देखा कि यहां प्रकृति का संरक्षण अत्यंत अनुकरणीय है। विशाल पर्वत, हरीतिमा से आवृत क्षेत्र और पर्यावरण संरक्षण के विविध प्रयास यहाँ की सुन्दरता और चेतना को और भी उज्ज्वल बनाते हैं। प्रकृति और संस्कृति का संगम, भारत में तो देखने को मिलता ही है, ऐसा अद्भुत संगम वहां भी देखने को मिला।

पूज्य स्वामी जी ने आगे कहा कि भारत, पुष्कर में भगवान ब्रह्मा जी का प्रसिद्ध मंदिर है, परन्तु बैंकाक में जगह-जगह ब्रह्मा जी के भव्य मंदिर देखने को मिलते हैं। श्री गणेश जी, भगवान शिव, श्री राम, माता काली और शक्ति के विविध स्वरूप यहाँ प्रतिष्ठित हैं। इन सभी के पूजन में थाई लोग बड़ी निष्ठा और आनंद से जुटते हैं। यह दृश्य बौद्ध और सनातन परम्पराओं के अद्भुत और सौहार्दपूर्ण संगम का प्रतीक है। यहां के मंदिरों में संस्कृत मंत्रों का उच्चारण किया जाता है, चाहे वह सनातन मंदिर हो या बौद्ध। भले ही उच्चारण में स्वर के अंतर हों, लेकिन भावना, भक्ति और आदर पूर्णतया भारतीय रंग में रँगा हुआ प्रतीत होता है।

स्वामी जी ने कहा कि यह अत्यंत प्रेरणादायक है कि थाई संस्कृति में भारतीय संस्कृति के अनेक तत्व गहराई से समाहित हैं, नामों में संस्कृत का प्रयोग, मंदिरों की स्थापत्य शैली, पूजा-पद्धति तथा आध्यात्मिक आयोजन, सब भारतीय संस्कृति से प्रभावित हैं। यह दृश्य देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो बैंकाक में भारतीय सांस्कृतिक पुनर्जागरण की एक दिव्य गाथा साकार हो रही हो। भारतीयता, अध्यात्म और संस्कृति का यह उत्सव यहां के प्रत्येक हृदय में धड़कता है।

साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि बैंकाक के लगभग 80 प्रतिशत होटल डेस्टिनेशन वेडिंग्स के कारण पूर्ण रूप से भरे हुए हैं। अधिकांश भारतीय परिवार आजकल यहां आकर विवाह समारोह आयोजित करते हैं। साध्वी जी ने कहा कि हमारा उत्तराखंड भी हरियाली और अद्भुत प्राकृतिक सौन्दर्य से परिपूर्ण है; उसे भी डेस्टिनेशन वेडिंग के रूप में विकसित किया जा सकता है। उत्तराखंड स्वयं भगवान शिव की पावन धरती है यहां गंगा जी हैं, हिमालय है और अपार प्राकृतिक सौन्दर्य बिखरा है। यहां विश्व-स्तरीय डेस्टिनेशन वेडिंग सेंटर्स बनाये जा सकते हैं।

आज बैंकाक में पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी स्वयं भारत की अद्भुत, प्राचीन और व्यापक सांस्कृतिक परम्परा के वैश्विक स्वरूप का साक्षात् अनुभव कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह दृश्य केवल संस्कृति की उपस्थिति नहीं, बल्कि मानव-हृदयों में बसे सनातन मूल्यों की जीवंतता का उत्सव है, यह दिव्यता, शुचिता और आध्यात्मिक एकात्मता की एक अनंत यात्रा है।

बैंकाक में गौतमभाई पटेल, रीटाबेन पटेल, निकभाई पटेल, प्रवीणभाई, मोहन पारा जी तथा सम्पूर्ण पटेल परिवार ने पूज्य स्वामी जी और पूज्य साध्वी जी को तेजस और जानकी के विवाह समारोह में विशेष रूप से आमंत्रित किया। पटेल परिवार भारतीय संस्कृति और संस्कारों को समर्पित जीवन जीने वाला परिवार है। लगभग 46 वर्ष पूर्व, पीट्सबर्ग (अमेरिका) में पूज्य स्वामी जी की प्रेरणा से निर्मित हिंदू जैन टेम्पल के निर्माण में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। और अब कृ 45 वर्ष बाद कृ उसी हिंदू जैन मंदिर के शिखर निर्माण में भी उन्होंने अद्भुत और अविस्मरणीय योगदान दिया है।

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