श्रीनगर:  कीर्तिनगर बाजार में उस समय हड़कंप मच गया जब एक विवाहिता ने पुल से अलकनंदा नदी में छलांग लगा दी।

सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने विवाहिता को नदी से बाहर निकाला, लेकिन हॉस्पिटल ले जाते समय विवाहिता ने रास्ते में दम तोड़ दिया।

फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। पुलिस के अनुसार 29 वर्षीय विवाहिता महिला ने पुल से अलकनंदा नदी में छलांग लगा दी। सूचना मिलते ही तत्काल पुलिस मौके पर पहुंची और महिला को नदी से निकाला गया।

जिसके बाद महिला को हॉस्पिटल के लिए भेजा गया, लेकिन विवाहिता ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।

वहीं बेस अस्पताल में तैनात डॉक्टर रोहित ग्रोवर ने बताया कि महिला को 108 से अस्पताल लाया गया था, लेकिन अस्पताल लाने से पहले ही महिला की मौत हो चुकी थी।

वहीं कोतवाल कीर्तिनगर कमल मोहन ने बताया कि मजिस्ट्रेट के सामने महिला का पंचनामा व पोस्टमॉर्टम की कार्रवाई की जाएगी. घटना की जांच की जा रही है और महिला के परिजनों को घटना की जानकारी दे दी है। वहीं मृतक महिला जाखधार की रहने वाली थी।

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बैरागी अखाड़ों के संतों ने लगाया सरकार पर फैसले थोपने का आरोप हरिद्वार। कुंभ मेला शुरू होने में अब कुछ ही समय शेष बचा है, मगर उससे पहले हरिद्वार में बैरागी अखाड़ों की नाराजगी दूर होती दिखाई नहीं दे रही है। इसी कड़ी में की नाराजगी दूर करने के लिये हरिद्वार पहुंचे अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी ने संतों से बंद कमरे में कई घंटे तक वार्ता की। इस दौरान बैरागी अखाड़ों के संतों ने कुंभ मेले के कार्यों को लेकर अपनी नाराजगी दर्ज कराई। इस मुलाकात में बैरागी अखाड़ों के श्री महंत और संतों ने कुंभ मेले के कार्य बैरागी कैंप में न होने पर अपनी नाराजगी दर्ज कराई। पंच निर्मोही अणि अखाड़े के श्री महंत राजेंद्र दास का कहना है कि हम चाहते हैं हरिद्वार का कुंभ भव्य और दिव्य हो. अभी तक कुंभ मेला प्रशासन द्वारा बैरागी अखाड़ों के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है, इसको लेकर अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि से चर्चा हुई है। मुख्यमंत्री से भी अनुरोध है कि प्रयागराज और वृंदावन की तर्ज पर ही कुंभ मेले को कराया जाए। वहीं, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने कहना है कि बैरागी अखाड़े के श्री महंत और संतों की मांग सही भी है, क्योंकि बैरागी अखाड़ों में टेंट, बिजली, पानी की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। सरकार से इस बारे में बातचीत की जाएगी और कहा जाएगा कि 13 अखाड़ों को जो भी व्यवस्था दी जाती है, वह सभी अखाड़ों को दी जाए। नरेंद्र गिरी ने कहा कि अभी तक हुए सरकार के कार्यों से संत संतुष्ट नहीं है, क्योंकि कुंभ मेले को लेकर बैरागी अखाड़ों के साधु संतों में असमंजस है। वहीं, राज्य सरकार पर शाही स्नान और कुंभ की अवधि घटाए जाने को लेकर भी महंत नरेंद्र गिरि ने नाराजगी जताई और कहा कि इस फैसले में अखाड़ा परिषद को विश्वास में नहीं लिया गया, इसलिये उसको मानने के लिए हम तैयार नहीं है। उनका कहना है कि कुंभ मेले के शाही स्नान की घोषणा मुख्यमंत्री और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद द्वारा की गई थी। उसमें कुंभ के चार स्नान की घोषणा की गई थी। यह बैठक कोरोना महामारी के वक्त हुई थी। मगर अब मुख्य सचिव द्वारा कहा जा रहा है कि दो ही शाही स्नान किए जाएंगे। इसको लेकर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद से सरकार ने कोई वार्ता नहीं की है। संतों ने सरकार को आश्वासन दिया गया था कि कोरोना महामारी को देखते हुए कुंभ का आयोजन किया जाएगा। मगर प्रयागराज का कुंभ हो गया, वृंदावन में मेला चल रहा है। वहां कोरोना को लेकर कोई दिक्कत नहीं हुई, मगर हरिद्वार में सरकार अपनी कमियां छुपाने के लिए कोरोना का बहाना कर रही है। उनका कहना है कि कुंभ मेले को लेकर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और शासन द्वारा निर्णय लिया जाता है।मगर उत्तराखंड सरकार अपने आप ही निर्णय ले रही है और उन फैसलों को हमारे ऊपर थोप रही है।