मुख्यमंत्री के मंत्रालय में चोरी मामले में अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं    

विकासनगर:  जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि दो-4 दिन पहले गृह अनुभाग-3 से फाइलें चोरी होने के मामले में सरकार को पहले विभाग के अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करनी चाहिए ।

बाद में कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज, कहीं ऐसा न हो कि अधिकारियों ने किसी षड़îंत्र के तहत उक्त फाइलों  को गायब कर दिया हो। नेगी ने कहा कि गृह मंत्रालय मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के पास है, जब उनका विभाग ही सुरक्षित नहीं है तो प्रदेश कैसे सुरक्षित रह सकता है।

नेगी ने हैरानी जताई कि सचिवालय जैसे सुरक्षित कार्यालय में जहां पर सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता रहती है, वहां से भी फाइल गायब होना, सरकार की बहुत बड़ी नाकामी है।

मोर्चा द्वारा पूर्व में डाकपत्थर बैराज की सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने के मामले में मुख्य सचिव से कार्रवाई की मांग की थी, जिसको मुख्य सचिव द्वारा कार्रवाई हेतु गृह विभाग को भेजा गया था, लेकिन उस फाइल का गृह विभाग में कोई अता-पता  नही है यानि कि उक्त अनुभाग लापरवाही का अड्डा बना हुआ है।

मोर्चा सरकार से मांग करता है की साजिशध् चोरी के मामले में अधिकारियों के खिलाफ भी कठोर कार्रवाई करें। पत्रकार वार्ता में अमित जैन, सुशील भारद्वाज आदि उपस्थित रहे।

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बैरागी अखाड़ों के संतों ने लगाया सरकार पर फैसले थोपने का आरोप हरिद्वार। कुंभ मेला शुरू होने में अब कुछ ही समय शेष बचा है, मगर उससे पहले हरिद्वार में बैरागी अखाड़ों की नाराजगी दूर होती दिखाई नहीं दे रही है। इसी कड़ी में की नाराजगी दूर करने के लिये हरिद्वार पहुंचे अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी ने संतों से बंद कमरे में कई घंटे तक वार्ता की। इस दौरान बैरागी अखाड़ों के संतों ने कुंभ मेले के कार्यों को लेकर अपनी नाराजगी दर्ज कराई। इस मुलाकात में बैरागी अखाड़ों के श्री महंत और संतों ने कुंभ मेले के कार्य बैरागी कैंप में न होने पर अपनी नाराजगी दर्ज कराई। पंच निर्मोही अणि अखाड़े के श्री महंत राजेंद्र दास का कहना है कि हम चाहते हैं हरिद्वार का कुंभ भव्य और दिव्य हो. अभी तक कुंभ मेला प्रशासन द्वारा बैरागी अखाड़ों के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है, इसको लेकर अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि से चर्चा हुई है। मुख्यमंत्री से भी अनुरोध है कि प्रयागराज और वृंदावन की तर्ज पर ही कुंभ मेले को कराया जाए। वहीं, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने कहना है कि बैरागी अखाड़े के श्री महंत और संतों की मांग सही भी है, क्योंकि बैरागी अखाड़ों में टेंट, बिजली, पानी की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। सरकार से इस बारे में बातचीत की जाएगी और कहा जाएगा कि 13 अखाड़ों को जो भी व्यवस्था दी जाती है, वह सभी अखाड़ों को दी जाए। नरेंद्र गिरी ने कहा कि अभी तक हुए सरकार के कार्यों से संत संतुष्ट नहीं है, क्योंकि कुंभ मेले को लेकर बैरागी अखाड़ों के साधु संतों में असमंजस है। वहीं, राज्य सरकार पर शाही स्नान और कुंभ की अवधि घटाए जाने को लेकर भी महंत नरेंद्र गिरि ने नाराजगी जताई और कहा कि इस फैसले में अखाड़ा परिषद को विश्वास में नहीं लिया गया, इसलिये उसको मानने के लिए हम तैयार नहीं है। उनका कहना है कि कुंभ मेले के शाही स्नान की घोषणा मुख्यमंत्री और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद द्वारा की गई थी। उसमें कुंभ के चार स्नान की घोषणा की गई थी। यह बैठक कोरोना महामारी के वक्त हुई थी। मगर अब मुख्य सचिव द्वारा कहा जा रहा है कि दो ही शाही स्नान किए जाएंगे। इसको लेकर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद से सरकार ने कोई वार्ता नहीं की है। संतों ने सरकार को आश्वासन दिया गया था कि कोरोना महामारी को देखते हुए कुंभ का आयोजन किया जाएगा। मगर प्रयागराज का कुंभ हो गया, वृंदावन में मेला चल रहा है। वहां कोरोना को लेकर कोई दिक्कत नहीं हुई, मगर हरिद्वार में सरकार अपनी कमियां छुपाने के लिए कोरोना का बहाना कर रही है। उनका कहना है कि कुंभ मेले को लेकर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और शासन द्वारा निर्णय लिया जाता है।मगर उत्तराखंड सरकार अपने आप ही निर्णय ले रही है और उन फैसलों को हमारे ऊपर थोप रही है।