हरिद्वार: हरिद्वार कुंभ में पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी की पेशवाई तीन मार्च को निकाली जाएगी। अखाड़ा प्रबंधन की ओर से पेशवाई की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। पेशवाई में 50 महामंडलेश्वर और हजारों की संख्या में संत शामिल होंगे। हेलीकॉप्टर से पांच क्विंटल गुलाब के फूलों की बारिश की जाएगी। दो ड्रोन पेशवाई की निगहबानी करेंगे।

रामपुर के ऊंट और हाथी पेशवाई की शान बनेंगे। अखाड़े की धर्म ध्वजा 27 फरवरी को स्थापित हो जाएगी। पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के सचिव एवं मां मनसा देवी ट्रस्ट के अध्यक्ष रविंद्र पुरी ने बताया कि एसएमजेएन पीजी कॉलेज के मैदान से सुबह 11 बजे बैंड बाजों के साथ पेशवाई निकलेगी।

महाराष्ट्र से कलाकारों को बुलाया गया है। पेशवाई कॉलेज के मैदान से शुरू होकर शंकर आश्रम, सिंहद्वार, देशरक्षक तिराहा, कनखल चैक, शंकराचार्य चैक, शिवमूर्ति चैक, वाल्मीकि चैक, गुजरावाला भवन, भाटिया भवन होकर शाम छह निरंजनी अखाड़ा पहुंचेगी। पेशवाई पर हेलीकॉप्टर से फूल बरसाए जाएंगे।

मंगलौर, दिल्ली, बिजनौर और नजीबाबाद से 10 क्विंटल गुलाब के फूल आएंगे। दो ड्रोन पेशवाई की पल-पल की रिकार्डिंग करेंगे। सचिव रविंद्र पुरी ने बताया कि पेशवाई में 50 महामंडलेश्वर शामिल होंगे। हजारों नागा मौजूद रहेंगे।

सबसे आगे भगवान कार्तिकेय का रथ चलेगा। इसके बाद आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशनंद गिरि का रथ होगा। उनके पीछे संतों की जमात चलेगी।

पेशवाई में रामपुर के छह हाथी, दो ऊंट और मंगलौर के 50 घोड़े शामिल होंगे। पेशवाई के लिए प्रयागराज से चांदी के सिंहासन और अहोदे सहित अन्य सामान निरंजनी अखाड़ा पहुंच गया है।

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बैरागी अखाड़ों के संतों ने लगाया सरकार पर फैसले थोपने का आरोप हरिद्वार। कुंभ मेला शुरू होने में अब कुछ ही समय शेष बचा है, मगर उससे पहले हरिद्वार में बैरागी अखाड़ों की नाराजगी दूर होती दिखाई नहीं दे रही है। इसी कड़ी में की नाराजगी दूर करने के लिये हरिद्वार पहुंचे अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी ने संतों से बंद कमरे में कई घंटे तक वार्ता की। इस दौरान बैरागी अखाड़ों के संतों ने कुंभ मेले के कार्यों को लेकर अपनी नाराजगी दर्ज कराई। इस मुलाकात में बैरागी अखाड़ों के श्री महंत और संतों ने कुंभ मेले के कार्य बैरागी कैंप में न होने पर अपनी नाराजगी दर्ज कराई। पंच निर्मोही अणि अखाड़े के श्री महंत राजेंद्र दास का कहना है कि हम चाहते हैं हरिद्वार का कुंभ भव्य और दिव्य हो. अभी तक कुंभ मेला प्रशासन द्वारा बैरागी अखाड़ों के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है, इसको लेकर अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि से चर्चा हुई है। मुख्यमंत्री से भी अनुरोध है कि प्रयागराज और वृंदावन की तर्ज पर ही कुंभ मेले को कराया जाए। वहीं, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने कहना है कि बैरागी अखाड़े के श्री महंत और संतों की मांग सही भी है, क्योंकि बैरागी अखाड़ों में टेंट, बिजली, पानी की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। सरकार से इस बारे में बातचीत की जाएगी और कहा जाएगा कि 13 अखाड़ों को जो भी व्यवस्था दी जाती है, वह सभी अखाड़ों को दी जाए। नरेंद्र गिरी ने कहा कि अभी तक हुए सरकार के कार्यों से संत संतुष्ट नहीं है, क्योंकि कुंभ मेले को लेकर बैरागी अखाड़ों के साधु संतों में असमंजस है। वहीं, राज्य सरकार पर शाही स्नान और कुंभ की अवधि घटाए जाने को लेकर भी महंत नरेंद्र गिरि ने नाराजगी जताई और कहा कि इस फैसले में अखाड़ा परिषद को विश्वास में नहीं लिया गया, इसलिये उसको मानने के लिए हम तैयार नहीं है। उनका कहना है कि कुंभ मेले के शाही स्नान की घोषणा मुख्यमंत्री और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद द्वारा की गई थी। उसमें कुंभ के चार स्नान की घोषणा की गई थी। यह बैठक कोरोना महामारी के वक्त हुई थी। मगर अब मुख्य सचिव द्वारा कहा जा रहा है कि दो ही शाही स्नान किए जाएंगे। इसको लेकर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद से सरकार ने कोई वार्ता नहीं की है। संतों ने सरकार को आश्वासन दिया गया था कि कोरोना महामारी को देखते हुए कुंभ का आयोजन किया जाएगा। मगर प्रयागराज का कुंभ हो गया, वृंदावन में मेला चल रहा है। वहां कोरोना को लेकर कोई दिक्कत नहीं हुई, मगर हरिद्वार में सरकार अपनी कमियां छुपाने के लिए कोरोना का बहाना कर रही है। उनका कहना है कि कुंभ मेले को लेकर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और शासन द्वारा निर्णय लिया जाता है।मगर उत्तराखंड सरकार अपने आप ही निर्णय ले रही है और उन फैसलों को हमारे ऊपर थोप रही है।